मेरी कविताएँ
मेरी भावनाओं की उड़ान, मेरे शब्दों की सच्चाई। ~चंदा
माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी…
जिंदगी में आयाम ऐसा हासिल करो किवक्त बेवक्त लोग तुम्हें सराहें। मंजिल सिर्फ आसमां पाने की न हो तुम्हारी,दिल की…
बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना…