3, Aug 2025
हल्की सी जिंदगी

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बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना…

वह और प्रतीक्षा

वह खड़ी थी द्वार पर,अपनी साँसें रोकी हुई।साँस ही नहीं, अपनी जीवन की गति रोकी थी,बिल्कुल बंद घड़ी की तरह।शायद…

माँ घर आ रही …

माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी…