25, Jul 2026
वह और प्रतीक्षा

वह खड़ी थी द्वार पर,अपनी साँसें रोकी हुई।साँस ही नहीं, अपनी जीवन की गति रोकी थी,बिल्कुल बंद घड़ी की तरह।शायद किसी के आने की प्रतीक्षा में,शायद… पथराई आँखें एकटक,जहाँ आशा की लौ जली भी थी,जिसे जबरदस्ती जला रखा था उसने,जैसे हवा में बुझते दिए को कोई तीली लगा रहा हो।वह…

22, Apr 2026
क्यों रोती नहीं बेटियां

क्यों रोती नहीं बेटियां ,जब जाती हैं पढ़ने को,अपने माँ-बाप से दूर,दूर देश, दूर का आकाश, दूर का संसार,कितने भी साल के लिए, अपने घर से दूर। बस बिछोह और दिल भारी-सा होता है उनका,पर रोती नहीं जार-जार वे,चीखती भी नहीं अपने पिता के गले लगकर,काँपती नहीं अपने बड़े भाई…

5, Apr 2026
तुम घर सम्भालो बस

कॉल बेल की आवाज़ से मैं उठ गई। वैसे तो सुबह के ८ बज रहे थे, लेकिन रात में ऑफिस से लेट आने की वजह से मैं देर तक सोई हुई थी और आज रविवार भी था, तो ऑफिस भी नहीं जाना था। मैं और मेरी नींद दोनों छुट्टी के…

5, Apr 2026
माँ घर आ रही …

माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी बचपन की यादों को। माँ घर आ रही… उसे पता है कि वह सिर्फ़ माँ है, न कि समाज का दिया दर्जा,जहाँ से उसे इजाज़त लेनी पड़े बेटी के ससुराल…

9, Feb 2026
तुम्हारा अस्तित्व

बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना किसी प्रतिकार केतुम्हारे हर फ़ैसले को स्वीकारती थी। फिर तुम बड़ी हुई, स्कूल जाने लगी।बग़ल के मुहल्ले में कठपुतली का खेल देखनातुम्हें बहुत प्रिय लगता था—उसका नाचना-गाना,किसी के इशारे पर,…

3, Aug 2025
27, Jul 2025
सफलता की पहचान

जिंदगी में आयाम ऐसा हासिल करो किवक्त बेवक्त लोग तुम्हें सराहें। मंजिल सिर्फ आसमां पाने की न हो तुम्हारी,दिल की समंदरी गहराई मापने का तजुर्बा भी आए। गर चर्चा चले कायनात फ़तह करने वालों की,तो सभी के जुबां पर “बरबस” ,तुम्हारा नाम आए!

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26, Jul 2025