25, Jul 2026
वह और प्रतीक्षा

वह खड़ी थी द्वार पर,अपनी साँसें रोकी हुई।साँस ही नहीं, अपनी जीवन की गति रोकी थी,बिल्कुल बंद घड़ी की तरह।शायद किसी के आने की प्रतीक्षा में,शायद… पथराई आँखें एकटक,जहाँ आशा की लौ जली भी थी,जिसे जबरदस्ती जला रखा था उसने,जैसे हवा में बुझते दिए को कोई तीली लगा रहा हो।वह…

19, May 2026
22, Apr 2026
क्यों रोती नहीं बेटियां

क्यों रोती नहीं बेटियां ,जब जाती हैं पढ़ने को,अपने माँ-बाप से दूर,दूर देश, दूर का आकाश, दूर का संसार,कितने भी साल के लिए, अपने घर से दूर। बस बिछोह और दिल भारी-सा होता है उनका,पर रोती नहीं जार-जार वे,चीखती भी नहीं अपने पिता के गले लगकर,काँपती नहीं अपने बड़े भाई…

5, Apr 2026
माँ घर आ रही …

माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी बचपन की यादों को। माँ घर आ रही… उसे पता है कि वह सिर्फ़ माँ है, न कि समाज का दिया दर्जा,जहाँ से उसे इजाज़त लेनी पड़े बेटी के ससुराल…

5, Aug 2025