आख़िरी विदाई
चली जाना दूर… लेकिन कितना दूर,एक बार बता कर चली जाती,कोई सीमा बना लेती तुम,दूरी की सीमा जहाँ अनंत न हो।तो जाने देती तुम्हें,क्योंकि जहाँ सीमा नहीं, वहाँ से लौटना सम्भव नहीं। अगर दूरी का विस्तार न्यूनतम होता, तोनहीं रोकती तुम्हें जाने से, कितना भी दूर।नहीं करती तुम्हारा सोलह श्रृंगार,नहीं…







