तुम घर सम्भालो बस
कॉल बेल की आवाज़ से मैं उठ गई। वैसे तो सुबह के ८ बज रहे थे, लेकिन रात में ऑफिस से लेट आने की वजह से मैं देर तक सोई हुई थी और आज रविवार भी था, तो ऑफिस भी नहीं जाना था। मैं और मेरी नींद दोनों छुट्टी के…

कॉल बेल की आवाज़ से मैं उठ गई। वैसे तो सुबह के ८ बज रहे थे, लेकिन रात में ऑफिस से लेट आने की वजह से मैं देर तक सोई हुई थी और आज रविवार भी था, तो ऑफिस भी नहीं जाना था। मैं और मेरी नींद दोनों छुट्टी के…

बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना किसी प्रतिकार केतुम्हारे हर फ़ैसले को स्वीकारती थी। फिर तुम बड़ी हुई, स्कूल जाने लगी।बग़ल के मुहल्ले में कठपुतली का खेल देखनातुम्हें बहुत प्रिय लगता था—उसका नाचना-गाना,किसी के इशारे पर,…