25, Jul 2026
वह और प्रतीक्षा

वह खड़ी थी द्वार पर,अपनी साँसें रोकी हुई।साँस ही नहीं, अपनी जीवन की गति रोकी थी,बिल्कुल बंद घड़ी की तरह।शायद किसी के आने की प्रतीक्षा में,शायद… पथराई आँखें एकटक,जहाँ आशा की लौ जली भी थी,जिसे जबरदस्ती जला रखा था उसने,जैसे हवा में बुझते दिए को कोई तीली लगा रहा हो।वह…

12, Jul 2026
बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ

बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ अब भागती नहीं हैं घर की ओर।आकाश से गिरती बूंदों को देख छुपती नहीं हैं किसी के घर के छज्जे के नीचे,बादली मौसम को देख ठहरती नहीं हैं किसी पेड़ की छाँव में, बचाते हुए ख़ुद को कुछ कम गीले कपड़ों में। वह चलती है…