25, Jul 2026
वह और प्रतीक्षा

वह खड़ी थी द्वार पर,अपनी साँसें रोकी हुई।साँस ही नहीं, अपनी जीवन की गति रोकी थी,बिल्कुल बंद घड़ी की तरह।शायद किसी के आने की प्रतीक्षा में,शायद… पथराई आँखें एकटक,जहाँ आशा की लौ जली भी थी,जिसे जबरदस्ती जला रखा था उसने,जैसे हवा में बुझते दिए को कोई तीली लगा रहा हो।वह…

12, Jul 2026
बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ

बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ अब भागती नहीं हैं घर की ओर।आकाश से गिरती बूंदों को देख छुपती नहीं हैं किसी के घर के छज्जे के नीचे,बादली मौसम को देख ठहरती नहीं हैं किसी पेड़ की छाँव में, बचाते हुए ख़ुद को कुछ कम गीले कपड़ों में। वह चलती है…

1, Jun 2026
आख़िरी विदाई

चली जाना दूर… लेकिन कितना दूर,एक बार बता कर चली जाती,कोई सीमा बना लेती तुम,दूरी की सीमा जहाँ अनंत न हो।तो जाने देती तुम्हें,क्योंकि जहाँ सीमा नहीं, वहाँ से लौटना सम्भव नहीं। अगर दूरी का विस्तार न्यूनतम होता, तोनहीं रोकती तुम्हें जाने से, कितना भी दूर।नहीं करती तुम्हारा सोलह श्रृंगार,नहीं…

28, May 2026
19, May 2026
22, Apr 2026
क्यों रोती नहीं बेटियां

क्यों रोती नहीं बेटियां ,जब जाती हैं पढ़ने को,अपने माँ-बाप से दूर,दूर देश, दूर का आकाश, दूर का संसार,कितने भी साल के लिए, अपने घर से दूर। बस बिछोह और दिल भारी-सा होता है उनका,पर रोती नहीं जार-जार वे,चीखती भी नहीं अपने पिता के गले लगकर,काँपती नहीं अपने बड़े भाई…

5, Apr 2026
माँ घर आ रही …

माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी बचपन की यादों को। माँ घर आ रही… उसे पता है कि वह सिर्फ़ माँ है, न कि समाज का दिया दर्जा,जहाँ से उसे इजाज़त लेनी पड़े बेटी के ससुराल…

8, Mar 2026
“स्कूटी उड़ाती ये लड़कियां”

ये लड़कियां, ये लड़कियां, ऑफिस जाती ये लड़कियां।भरी सड़क पर भीड़ में, स्कूटी उड़ाती ये लड़कियां। सही समय पर ऑफिस जाऊं, सही समय से गृहस्थी निभाऊं।सही समय निभाते–निभाते, खुद को भुलाती ये लड़कियां।भरी सड़क की भीड़ में, खुद को रेल बनाती ये लड़कियां। कभी अपना लंच बॉक्स भूलती, कभी अपना…

9, Feb 2026
तुम्हारा अस्तित्व

बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना किसी प्रतिकार केतुम्हारे हर फ़ैसले को स्वीकारती थी। फिर तुम बड़ी हुई, स्कूल जाने लगी।बग़ल के मुहल्ले में कठपुतली का खेल देखनातुम्हें बहुत प्रिय लगता था—उसका नाचना-गाना,किसी के इशारे पर,…

24, Sep 2025
हिम्मत करो

तुम ताक पर रख आना हताशा की तस्वीर को, तुम भूल-बिसरा देना अपनी बदनसीब तक़दीर को। तुम तम को एक दीप से मिटा देना — हिम्मत करो, तुम साथ चलो हौसलों के संग, इतनी शिद्दत करो। यूँ वक्त का ठहर जाना ,मुमकिन नहीं इस कायनात में, तुम फ़तह कर आओगे…