तुम घर सम्भालो बस
कॉल बेल की आवाज़ से मैं उठ गई। वैसे तो सुबह के ८ बज रहे थे, लेकिन रात में ऑफिस से लेट आने की वजह से मैं देर तक सोई हुई थी और आज रविवार भी था, तो ऑफिस भी नहीं जाना था। मैं और मेरी नींद दोनों छुट्टी के…

कॉल बेल की आवाज़ से मैं उठ गई। वैसे तो सुबह के ८ बज रहे थे, लेकिन रात में ऑफिस से लेट आने की वजह से मैं देर तक सोई हुई थी और आज रविवार भी था, तो ऑफिस भी नहीं जाना था। मैं और मेरी नींद दोनों छुट्टी के…

माँ घर आ रही । अपने आँचल की कोर में बाँधे हुए रूढ़ प्रथाओं को,अपने हृदय में समेटे हुए मेरी बचपन की यादों को। माँ घर आ रही… उसे पता है कि वह सिर्फ़ माँ है, न कि समाज का दिया दर्जा,जहाँ से उसे इजाज़त लेनी पड़े बेटी के ससुराल…

“मैं बहुत डर-सी गई थी। डॉक्टर ने प्रिस्क्रिप्शन में एमआरआई लिख दिया था। वैसे तो चालीस पार जा चुकी हूँ, पर कभी इस टेस्ट की नौबत नहीं आई। गुस्सा आ रहा था मुझे अपने पति पर — बस एक राग अलापते रहते हैं, फुल बॉडी चेकअप कराओ। उनकी ज़िद के…

ये लड़कियां, ये लड़कियां, ऑफिस जाती ये लड़कियां।भरी सड़क पर भीड़ में, स्कूटी उड़ाती ये लड़कियां। सही समय पर ऑफिस जाऊं, सही समय से गृहस्थी निभाऊं।सही समय निभाते–निभाते, खुद को भुलाती ये लड़कियां।भरी सड़क की भीड़ में, खुद को रेल बनाती ये लड़कियां। कभी अपना लंच बॉक्स भूलती, कभी अपना…

बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना किसी प्रतिकार केतुम्हारे हर फ़ैसले को स्वीकारती थी। फिर तुम बड़ी हुई, स्कूल जाने लगी।बग़ल के मुहल्ले में कठपुतली का खेल देखनातुम्हें बहुत प्रिय लगता था—उसका नाचना-गाना,किसी के इशारे पर,…

तुम ताक पर रख आना हताशा की तस्वीर को, तुम भूल-बिसरा देना अपनी बदनसीब तक़दीर को। तुम तम को एक दीप से मिटा देना — हिम्मत करो, तुम साथ चलो हौसलों के संग, इतनी शिद्दत करो। यूँ वक्त का ठहर जाना ,मुमकिन नहीं इस कायनात में, तुम फ़तह कर आओगे…

कुछ ख़ास है आज का दिन, कुछ बड़ा सा सूरज, कुछ ज्यादा सुनहरी किरणें। कुछ ज़्यादा गहराई हुई धरती की हरियाली। कुछ ज्यादा ही खूबसूरत, प्रकृति के नजारे। कुछ ख़ास है आज का दिन, कुछ बड़ी सी हंसी, कुछ बड़ी –बड़ी बातें। छोटी सी उम्र में कुछ बड़े –बड़े वादे।…

ज्ञान की “अरुणिमा” से जीवन में” सुषमा” लाने वाली, दोराहा हो तो “मोनिका “बन उचित राह दिखाने वाली, लक्ष्य को प्राप्त करो , वह है “निकिता “बनाने वाली,हर उस गुरु मां को सरस्वती का “साक्षी” मान कर मै नमन करती हूं। Happy teacher’s day✍️Chanda

स्वतंत्रता दिवस ,बचपन से ही मोहक रहा है। सुबह जल्दी उठना, स्कूल जाना, झंडा फहराना और जलेबी मिलना—ये किसी पर्व से कम नहीं था। धीरे-धीरे बड़े हुए तो समझ आया कि हम स्वतंत्र कैसे हुए, कितने बलिदानों और संघर्षों के बाद हमें यह आज़ादी मिली। बलिदान की इन कहानियों ने…

ये दोस्त भी न “ग्रीन टी” की तरह होते हैं,बस, डिफरेंस इतना है कि “ग्रीन टी” पी कर बॉडी डिटॉक्स होती है और दोस्त से मिल कर लाइफ….. डिटॉक्स । @chanda✍️