मेरी कविताएँ
मेरी भावनाओं की उड़ान, मेरे शब्दों की सच्चाई। ~चंदा
बचपन में तुम्हें गुड्डे-गुड़िया बहुत पसंद थे,उसके घुँघराले बाल, उसकी गोल-गोल आँखें,जिसे तुम सँवारती थी, उसे सजाती थी।वह गुड़िया बिना…
स्वतंत्रता दिवस ,बचपन से ही मोहक रहा है। सुबह जल्दी उठना, स्कूल जाना, झंडा फहराना और जलेबी मिलना—ये किसी पर्व…