हिम्मत करो
तुम ताक पर रख आना हताशा की तस्वीर को,
तुम भूल-बिसरा देना अपनी बदनसीब तक़दीर को।
तुम तम को एक दीप से मिटा देना — हिम्मत करो,
तुम साथ चलो हौसलों के संग, इतनी शिद्दत करो।
यूँ वक्त का ठहर जाना ,मुमकिन नहीं इस कायनात में,
तुम फ़तह कर आओगे जंग अकेले न रहो इस गुमान में।तुम बनाओ समन्वय का रास्ता, यह ज़रूरी है,
तुम दिखाओ समरसता का वास्ता ख़ुदा की यही मंज़ूरी है।
सूरज भी लगाएगा तुम्हें ,अपनी किरणों का सुर्ख़ रंग,
पर्वत भी संवारेगा अपनी खुरदुरी ज़मीं का ढंग।
इंकलाब करके चलो, तुम हाथ थामे खूब चलो,
गर सोच लो सब साथ हों — तो वक्त भी मिलाएगा क़दम।
