“दुनियां दोस्तों वाली”
कितनी स्ट्रेंज है न! ये हमारी ज़िन्दगी!
सब–कुछ, नाप–तौल कर करना है!
जैसे कि ये ज़िन्दगी नहीं.. कोई दुकान हो!
तमीज का बट्टा, शराफ़त का तराजू!
बस! आप एक “सामान” बन कर रह जाते हो।
अपने आप को ताख़ पर रख दो,
और दूसरों के लिए रोल मॉडल बन जाओ।
बस यही है ये स्ट्रेंज वाली ज़िन्दगी!!!!
उफ़्फ़………………………लेकिन…
इस दुनियां के अंदर एक छोटी सी और दुनियां है!
जहाँ कुछ भी कहो, कैसे भी कहो!
जब दिल करे बको, जब दिल करे हंसो,
दिल से निकले हर जज़्बात की तबज्जों है,
उस छोटी-सी दुनियाँ के आप ही हीरो हैं।
जहाँ कोई न आपके खूबियों को तौलता है,
और न जहाँ कोई आपके कमियों को ख़ोजता है,
जहाँ आप आज़ाद हो स्ट्रेंज लोगों की अपेक्षाओं से,
जहाँ आपको सब अपने दिलों में रखता है।
ये छोटी सी दुनियाँ, बड़ी ख़ास होती है,
बस दोस्त होते हैं यहाँ, सारी बातें ही कमाल होती है।

