बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ
बारिश में भीगती हुई लड़कियाँ अब भागती नहीं हैं घर की ओर।
आकाश से गिरती बूंदों को देख छुपती नहीं हैं किसी के घर के छज्जे के नीचे,
बादली मौसम को देख ठहरती नहीं हैं किसी पेड़ की छाँव में, बचाते हुए ख़ुद को कुछ कम गीले कपड़ों में।
वह चलती है भीगते हुए बीच सड़क पर या गलियों में।
खड़ी रहती है चौराहे पर उन सभी मर्दों के साथ, जो हर बारिश में भीगते हैं और अपने काम पर जाते हैं।
वह सोचती नहीं कि क्या कहेगा ज़माना उसे भीगते देख,
क्योंकि सिनेमा में भीगती लड़की को ज़माने ने कुछ और नाम दिया,
और सिनेमा तो समाज का ही दर्पण है।
वह तो अब भीगती है पूरे सिर से पाँव तक,
क्योंकि अब बारिश से भागकर घर में गर्म पकौड़े तलने का काम कम कर दिया उन्होंने।
उन्हें भी अब आँगन से सूखे कपड़े हटाने के काम के अलावा कई काम हैं—
किसी का ऑफिस, किसी की दुकान, किसी की पढ़ाई, किसी की जीविका,
और न जाने बूंदों की तरह कितने अनगिनत काम।
बारिश में भीगकर वह छीन लेती है अपना हक उन सभी से,
जिन्हें अब भी लगता है कि ख़राब मौसम में लड़कियाँ भीगकर घर वापस चली जाती हैं।
बारिश से रूबरू हो वह जता देती है कि बारिश में सिर्फ़ फ़िल्मी हीरोइन ही नहीं भीगती,
भीगती है आम लड़किया भी अपनी कई ज़िम्मेदारियाँ निभाने, अपना भविष्य बनाने और अपने कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ने के लिए ।
✍️चंदा

This is truly beautiful. It brought a smile to my face. 😊